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ISSN 2292-9754

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01.01.2015


नाम अपना किसान है साहब

नाम अपना किसान है साहब।
घर में गीता कुरआन है साहब।

आग पानी से सर बचाने को।
एक टूटा मकान है साहब।

हम गरीबों से टैक्स क्या लोगे।
छोटी मोटी दुकान है साहब।

चैन की साँस ले नही सकता।
एक बेटी जवान है साहब।

एक टूटा हुआ दीया हूँ मै।
पूरी दुनियाँ तुफान है साहब।

बात हक़ की तो कर ही सकता हूँ।
इतनी लम्बी जुबान है साहब।

सूखी रोटी कटे फटे कपडे।
ये मेरा खानदान है साहब।

ज़िन्दगी को गुज़ारने के लिए।
ये ज़मीं आसमान है साहब।

मेरे खेतों पर मत करो कब्ज़ा।
मेरी खेतों में जान है साहब।

लुट चुका कितनी बार है फिर भी।
मेरा भारत महान है साहब।

इसलिए मौत पे भरोसा है।
ज़िन्दगी बेईमान है साहब।


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