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ISSN 2292-9754

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02.19.2016


बुरा है क्या और क्या अच्छा

बुरा है क्या और क्या अच्छा दिखाई देता है।
झूठ है क्या और क्या सच्चा दिखाई देता है।

धर्म के नाम पर हम को यूँ ना गुमराह करो
हमें भी आँख से रस्ता दिखाई देता है।

ख़ुशी के जाम से इक रोज उबरकर देखो
हमारी आँख में दरिया दिखाई देता है।

सियासी लोगोँ की ये जंग ख़त्म होने पर
जहाँ भी देखिये सहरा दिखाई देता है।

आप बतलाइये कि आप को मेरे दिल में
ग़ौर से देखने पर क्या दिखाई देता है।

हमें अफ़सोस यही है कि आज भी उनको
हमारा रोना तमाशा दिखाई देता है।

वफ़ा की राह मे जाऊँ तो किस तरह जाऊँ
हर एक मोड़ पे पहरा दिखाई देता है।

तुम्हें भी इश्क़ में बस चोट मिली है शायद
तभी तो जख़्म ये गहरा दिखाई देता है


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