अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.10.2016


खोपचा....

ढूँढता हूँ तुझे मैं
हर नुक्कर, गली-मुहल्ले
घर, बाज़ार और शहर
तेरी अस्मिता के पंख फैले हैं कहाँ....???
भूल गया हूँ मैं
ए 'मुस्कुराहट'
बता तू किस 'खोपचे' में बस्ती है 'अब'


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें