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ISSN 2292-9754

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01.10.2016


बेख़बर फिर 'मैं'

रास्तों पर से कदमों का यूँ चलते रहना
फिर कहीं रुक जाना
चलना,
रुकना,
फिर वापिस लौट जाना
समझ ना पाई इस आने-जाने को
बेख़बर फिर 'मैं'
मंज़िल की तलाश में....


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