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| 01.26.2008 |
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जहाँ चाह, वहाँ राह |
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एक मार्ग खो गया दुख मिले, सुख मिले, मुक्ति मिल सके जहाँ सत्य को असत्य को, सत्व-तत्व का प्रमाण कर्म जो मिला, किया नर्क स्वर्ग का निदान साधना में कोटि-कोटि प्राण खोजता रहा एक राह खो गयी तीर्थ-धाम सब किये |
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