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ISSN 2292-9754

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12.06.2015


संभलते हैं

संभलते हैं,
फिर चोट खाने के लिए!
उठते हैं,
फिर गिर जाने के लिए!
रोतें हैं,
फिर मुस्कुराने के लिए!
चुप हैं,
फिर से गीत गाने के लिए!


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