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02.02.2008
 
संभलते हैं
शिप्रा वर्मा

संभलते हैं,
फिर चोट खाने के लिए !
उठते हैं,
फिर गिर जाने के लिए !
रोतें हैं,
फिर मुस्कुराने के लिए !
चुप हैं,
फिर से गीत गाने के लिए !


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