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ISSN 2292-9754

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12.06.2015


चोट

चोट खाने का हो तुम्हें
कितना भी अनुभव सही
बार बार यूँ चोट खाना
अच्छा तो ल्रगता नहीं ।

वो तो खुशनसीब था
जो देवदास ही हो गया
हर किसी की गति यही हो
यह ज्ररूरी तो नहीं ।

ठीक हैं कि हादसें
और भी करतें हैं बलवती
टूटा हुआ दिल पर किसी को
दीख सकता है नहीं ।
 
दुःख और सुख का आना जाना
मानतें हैं सभी सही पर;
दुःख का आ कर जल्द न जाना
झेलना क्या कठिन नहीं!


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