चोट खाने का हो तुम्हें कितना भी अनुभव सही बार बार यूँ चोट खाना अच्छा तो ल्रगता नहीं । वो तो खुशनसीब था जो देवदास ही हो गया हर किसी की गति यही हो यह ज्ररूरी तो नहीं । ठीक हैं कि हादसें और भी करतें हैं बलवती टूटा हुआ दिल पर किसी को दीख सकता है नहीं ।
दुःख और सुख का आना जाना मानतें हैं सभी सही पर; दुःख का आ कर जल्द न जाना झेलना क्या कठिन नहीं!