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ISSN 2292-9754

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03.14.2015


नारी हूँ मैं

नारी हूँ मैं
पूरक भी मैं
समर्पण भी
श्रंगार हूँ, जीवन दर्शन भी

नारी हूँ मैं
ममतामयी, करुणामयी
मोहक मादक रसधार भी मैं
पल्लव पल्लव सिंचित करती
हूँ नवसृजन का आधार भी

नारी हूँ मैं
कोमल हूँ कमजोज़ोर नहीं
सबला हूँ मैं लाचार नहीं
तोड़ती तटबंध वर्जनाओं के
हूँ नभ में चमकता सूरज भी

नारी हूँ मैं
मर्यादा हूँ शालीनता भी
घर की इज़्ज़त, सुन्दरता भी
चंदन की शीतलता मुझमें
हूँ भड़कती ज्वाला भी

नारी हूँ मैं
हर रिश्ते में ढल जाती हूँ
बन मोम पिघल सी जाती हूँ
संघर्षों से ना डरने वाली
हूँ झाँसी की रानी भी

नारी हूँ मैं
ममता का आँचल लहराती
पत्नी बन जीवन महकाती
बेटी हूँ लक्ष्मी भी मैं
सृष्टि का अवलम्ब भी
नारी हूँ मैं
हूँ शब्द भी आवाज़ भी
लेखनी सशक्त दमदार भी
रस छन्द अलंकार मुझमें
साहित्य का शृंगार भी

नारी हूँ मैं
धरा से आकाश तक
शिखर से सिन्धु तक
विस्तार ही विस्तार हूँ
मैं सत्य हूँ अभिमान भी

नारी हूँ मैं
भावना के पंथ पर
हृदय का स्पंदन हूँ
गर्व हूँ मैं देश का
मान की अधिकारिणी
नारी हूँ मैं


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