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ISSN 2292-9754

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12.03.2015


मैं हूँ एक नदिया


मैं हूँ एक नदिया
.........मैं हूँ एक धारा,
मैं सागर से मिलने
.....लहक कर चली हूँ।

लचकती, महकती
.......यूँ सजती सँवरती
मैं सागर से मिलने
...... बहक कर चली हूँ।

कभी टेढ़े-मेढ़े
..........जो रस्ते हैं आते
सँभलती मचलती
..........उफनकर चली हूँ।

सदियों की प्यासी
.........तड़पती मिलन को
मैं राहें बनाती
...........छलकती चली हूँ।
कभी हूँ मैं तपती
...........कभी हूँ मैं शीतल
मैं हँसती-हँसाती
.............दमकती चली हूँ।

वो है मेरी मंज़िल
............वो है मेरा साहिल
मैं ख़ुद को मिटाने
...........ललक कर चली हूँ।

मैं हूँ एक नदिया
................मैं हूँ एक धारा,
मैं सागर से मिलने
............लहक कर चली हूँ।


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