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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


ख़ास "तुम" हो बेहद ख़ास

ख़ास
तुम हो
बेहद ख़ास,
जैसे कोई आस
मुस्कुराती सुबह
नर्म मुलायम रात
ख़ास
बेहद ख़ास
दिल के झरोखे में
ख़ुशी का मीठा सा आभास
गुनगुनी सी धूप
चाँदनी का साथ
ख़ास
बेहद ख़ास
जैसे पलकों पे मोती
चमकती ओस
वो पहली छुवन
गुदगुदा सा अहसास
ख़ास
बेहद ख़ास
रेशमी कोंपल
या सौंधी ख़ुशबू माटी की
पायल की रुनझुन
या खनक चूड़ी की
हो बस रहे साँसों में
कस्तूरी से
सम्मोहक !!!
सम्मोहन !!!
ख़ास
बेहद ख़ास
तुम
सिर्फ तुम


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