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| 06.30.2008 |
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सृजन |
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जब रिमझिम हो बरसात जब कण -कण महके प्रीत जब नभ पे हँसता चाँद जब मन छेड़े संगीत जब पँछी करें किलोल जब बन्धन की हो रीत जब कोकिल मिश्री घोले जब संग चले मनमीत |
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