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| 04.29.2008 |
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पाहुन |
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वासंती पाहुन घर आया
ओझल न हो पल भर साजन
चाह से तुमने देखा जैसे उर से उभरे गान सुरीले
प्राणों की बगिया में मोरे
किरण जाल न डाल चितेरे |
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