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| 12.30.2008 |
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नव वर्ष आया है द्वार |
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मंगल दीप जलें अम्बर में सुवर्ण रश्मियाँ बाँध लड़ी चन्दन मिश्रित चले बयार प्रेम के दीपक, स्नेह की बाती खुशियों के बाँटें उपहार नव निष्ठा, नव संकल्पों के सुख सपनें होंगे साकार |
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