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| 12.30.2008 |
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हिम कण |
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आज शिशिर ने नील गगन के देख धरा की आँख उनींदी मौन हुई अब चहुँ दिशाएँ आज शिशिर ने डाली-डाली कुछ दिन पहले ऋतुराज ने और ग्रीष्म के ताप की पीड़ा आज धरा की अंखियों में धीमे से बरसेंगे हिमकण |
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