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आतंकवादियो!
कर दो आतंक प्रचण्ड
चहुँ ओर फैला दो आतंक,
हिला दो सारा ब्रह्माण्ड।
किन्तु!
अपने ही
भाइयों को मार कर
नहीं,
देश में
सांप्रदायिकता फैला कर
नहीं,
हटाकर
अशिक्षा, गरीबी और भ्रष्टाचार को,
बढ़ाकर
तकनीक, अर्थ और ऊर्जा को,
जोड़ कर
देश के खण्ड खण्ड को,
बना दो इसे अखण्ड
कर दो अपना आतंक प्रचण्ड।
कोई ’कनिष्क’ या
किसी गुरुद्वारे, मंदिर, मस्जिद को
गिराकर नहीं,
किसी ’डब्ल्यू.टी.सी’ या संसद को,
उड़ा कर नहीं,
किसी ’आसाम मेल’
या,
’गुहाटी मेल’ को
भिड़ाकर नहीं —
मेल बढ़ाकर कर,
भाईचारे का,
फैला कर सार,
जीवन मूल्यों का,
गीता, कुरान, बाईबल
ग्रन्थसाहिब की
अखण्डता, निरन्तरता
बना कर,
बना दो अपने
आर्यवर्त को
एक अखण्ड
ब्रह्मण्ड।
कर दो अपना आतंक प्रचण्ड।
कर दो अपना आतंक प्रचण्ड॥
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