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12.06.2008
 

वक़्त की शतरंज 
शार्दुला नोजा (झा)


है वक़्त भी शातिर खिलाड़ी खेल पक्के खेलता है।
शतरंज पे मौहरें बिछा कर, आगे-पीछे ठेलता है।
हो कहीं भी प्यादा, घर बस एक ही चल पायेगा
घोड़ा बिदक ढाई चले, और ऊंट टेढ़ा जाएगा।
रानियाँ हर देश में राजा पे ख़ुद को वारतीं
परदेस में रह कर भी घर की सभ्यता नहीं हारतीं।


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