तू पीठ सीधी रख ओ लड़की ! शार्दुला नोगाजा (झा)
तू पीठ सीधी रख ओ लड़की बस आज ये सिंगार कर ले, स्टील, लोहा, सोना, चाँदी जो मिले, ले रीढ़ मढ़ ले ! तू पीठ सीधी . . .
आज तू काजल लगा ना अपनी कलम स्याही से भर ले, झूमर में हैं जो दो सितारे कर यत्न, आँखों में उतर लें ! तू पीठ सीधी . . .
गूढ़तम जो प्रश्न होगा लौटेगा अनुत्तरित समझ ले ना रामशलाकाप्रश्नावली ये जीवन तू जी इसे, उत्तरित कर ले ! तू पीठ सीधी रख ओ लड़की !