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11.30.2008
 

तू पीठ सीधी रख ओ लड़की !
शार्दुला नोगाजा (झा)


तू पीठ सीधी रख ओ लड़की
बस आज ये सिंगार कर ले,
स्टील, लोहा, सोना, चाँदी
जो मिले, ले रीढ़ मढ़ ले !
तू पीठ सीधी . . .

आज तू काजल लगा ना
अपनी कलम स्याही से भर ले,
झूमर में हैं जो दो सितारे
कर यत्न, आँखों में उतर लें !
तू पीठ सीधी . . .

गूढ़तम जो प्रश्न होगा
लौटेगा अनुत्तरित समझ ले
ना रामशलाकाप्रश्नावली ये जीवन
तू जी इसे, उत्तरित कर ले !
तू पीठ सीधी रख ओ लड़की !


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