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11.30.2008
 

गुड मॉर्निंग सूरज!
शार्दुला नोगाजा (झा)


सुबह उठी तो ये क्या देखा
Van Gogh की पेंटिंग जैसा
सूर्यमुखी का पीलापन ले
आज निखर आया है सूरज!

शाम लगाई डुबकी जल में
और बादलों से मुँह पोंछा
लाली लगा कमलदल वाली
कितना इतराया है सूरज!

आजा तुझ को मजा चखाऊँ
डुबो चाय में मैं खा जाऊँ
पा कर मेरे प्यार की झप्पी
कितना शरमाया है सूरज!

आज बाँध कर चुन्नी में मैं
अमलतास पे लटका दूँगी
रँगोगे क्या जीवन सबके
सुन क्यों घबराया है सूरज!


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