शरद तैलंग

दीवान
अपनी करनी का ज़माना ...
अब नये शहरों के
आप तो बस अपना ही...
आपका दिल जब समंदर ..
जब तलक़ आसमान बाक़ी है
जब दिलों में प्यार का ...
दिल के छालों का ज़िक्र ...
मेरा साया मुझे हर वक़्त
समेटे सब को अपने में ...
लघु कथाएँ
अंत
अभिशाप
मापदण्ड
व्यवस्था
सफाई
व्यंग्य
गुस्से में है भैंस
विवाह का एल्बम
होता जो हनीमून नेपाल में