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05.03.2012
 

मापदण्ड
शरद तैलंग


बहुत दिनों तक अपने बिल में बैठे बैठे जब साँप उकता गया तो एक दिन सैर सपाटे के लिए बाहर सड़क पर घूमने निकल गया। सड़क पर लोगों ने जैसे ही साँप को घूमते देखा वे लाठी और पत्थर लेकर उसे मारने दौड़ पडे़। बड़ी मुश्किल से साँप अपनी जान बचाकर वापस बिल में घुस गया।

बाहर की दुनियाँ के लोग तो मुझसे बड़ी घृणा करते हैं। वे तो मेरी सूरत तक देखना पसंद नहीं करते। परन्तु क्या कारण है जब मैं भगवान शंकर के गले में या उनके शरीर पर बैठा रहता हूँ तो वे ही लोग मेरी पूजा करते हैं?’ साँप ने अपनी साँपिन से पूछा।

अरे यही तो बात है आज की दुनियाँ में किसी से घृणा या उसकी पूजा करने का मापदण्ड यह नहीं है कि वह अच्छा है या बुरा वरन्‌ यह है कि वह सड़क पर है या किसी ऊँची जगह बैठा है। साँपिन ने साँप को समझाया।

    (राजस्थान पत्रिका  में प्रकाशित)


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