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| 05.31.2008 |
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अपनी करनी का ज़माना एक दिन फल पाएगा |
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अपनी करनी का ज़माना एक दिन फल पाएगा,
आग कुछ ऐसी लगेगी ये जहाँ जल जाएगा। हमने यूँ तो ख़ैरियत लिख दी उन्हें मज़मून में, हम शिकस्ता हाल है उनको पता चल जाएगा। इतनी बारिश में अगर जो घर तुम्हारा बह गया, फिक्र मत करना ख़ुदा का घर तुझे मिल जाएगा। उसने अपनी लाश भी चीलों के आगे फेंक दी, सोच कर इस पुण्य का वो एक दिन फल पाएगा। हमने पूछा उस जगह अब क्यूँ इबादत बंद है, हँस के बोले कुछ दिनों तक हादसा टल जाएगा। डाकिये ने मौत की चिट्ठी न पँहुचाई कभी ये समझकर ’जो यहाँ आया है सो कल जाएगा’। |
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