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| 05.31.2008 |
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अंत |
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टेलीफोन की घंटी बजते ही सुषमा ने फोन उठाया,
“हैलो”
।
“क्या
नरेश जी से बात हो सकती है”
उधर
से किसी महिला की आवाज़ आई।
“वे
कहीं बाहर गये हुए है।”
सुषमा ने जबाव दिया।
“आप
कौन बोल रहीं है”
उसने
फिर पूछा।
“मैं
उनकी पत्नी सुषमा हूँ। आप शाम को पाँच बजे के बाद उनसे बात कर सकतीं
हैं”,
सुषमा बोली।
“नहीं,
अब
मुझे उनसे बात नहीं करनी है”,
स्वर
में क्रोध था। कुछ ही पल में उधर से लाइन काट दी गई।
(हंस में प्रकाशित) |
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