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| 11.03.2007 |
| फिर -- पूर्णिमा रात होगी शम्भू नाथ |
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फिर कभी बरसात होगी,
वही पूर्णिमा रात होगी हर तरफ खुशियाँ रहेंगी, फूलों की मुस्कान होगी चिड़िया चहकेगी चमन में, हर दुख का नाश होगा अपने प्यारे देश में अपनी एक पहिचान होगी फिर कभी बरसात होगी, वही पूर्णिमा रात होगी। न रहेगा भेद भाव न तो अत्याचार होगा, न करेगा कोई चोरी न ही कोई पाप होगा हर एक घर में सुबह शाम खुशियों की भरमार होगी फिर कभी बरसात होगी, वही पूर्णिमा रात होगी। फिर यहाँ पर राम होंगे, नित्य मोहन का नाच होगा, है पुरानी परम्परा ये बुराई का विनाश होगा, गीत गायेगी सुहागिन, जुगुनुओं की शाम होगी फिर कभी बरसात होगी, वही पूर्णिमा रात होगी। न मरेगा कोई भूखा न कमी होगी कभी, हर बला टलती रहेगी, लोगों को आभास होगा, जब हटेगी ये बेरुख़ी, लालच का न नाम होगा फिर शुरू होगी कहानी जिसके सिर पर ताज होगा मन्द हवायें फिर चलेंगी खिलखिलती रात होगी मेरे देश के हे नेताओं हर कमी को दूर कर दो बह रही जो खून की नदिया बहने पर मजबूर कर दो हर ज़ुबाँ पे तेरा नाम सुबह होगा शाम होगा इतिहास के पन्नों पर जब तुम भी नाम लिखाओगे इस जहाँ से उस जहाँ तक तुम भी नाम कमाओगे हर गली में नाम तेरी हर ज़ुबाँ पे बात होगी फिर कभी बरसात होगी, वही पूर्णिमा रात होगी। |
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