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11.03.2007
 
नशे बाज की यही कहानी
शम्भू नाथ

ये दारू की मस्ती है इंगिलस यहाँ पे सस्ती है
ये सेहत के लिए भी अच्छी है मस्तानों की बस्ती है

पैग लगा के नशे में होते बनते बडे़ नबाब
घर मे भूंजी भांग नहीं है पर चाहिये इन्हें कबाब
दारू का पैसा न मिलने पर बेचे गड़ा खजाना
नशे में टुन्न हो के आते पीछे फटा पजामा
खाना खाते नखरे करते कहते सब्जी कच्ची है
ये दारू की मस्ती है इंगिलस यहाँ पे सस्ती है

बीबी की तो खैर नहीं है खूब करे नौटंकी
तोड़ फोड़ घर भर में करते बचे न पानी की टंकी
माँ बाप कोई न बोले सबसे अलगा बिलगी
गिरते पड़ते जब रात को आये बच्चे खोले खिड़की
हाथ पैर सब टूटे फूटे नशे बाज की यही कहानी
अण्ड-सण्ड खूब गाली बकते झगड़े भी करते मनमानी
गिलास पे गिलास चटका रहे है कहते दारू नहीं ये लस्सी है
ये दारू की मस्ती है इंगिलस यहाँ पे सस्ती है

कभी-कभी तो इतनी पीते कि लोग उठा के लाते हैं
हाथ पैर में गंद लगा है घर वाले नहलाते हैं
ठोकर लगते ही गिर जाते रात बिताते खेत में
नशा उतरने पे मालुम होता कुत्ता पानी दे गया मुँह में
फिर भी इनको शर्म न आती सुबह से जलती भट्टी है
ये दारू की मस्ती है इंगिलस यहाँ पे सस्ती है

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