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11.03.2007
 
लालू जी खेलत है होली
शम्भू नाथ

लालू जी खेलत है होली
लालू खेलत है रंग
भंग है खूब चढ़ाते
ढोल मंजीरा संग
फाग की तान सुनाते
कुछ तो देत अबीर का टीका
कुछ मारत पिचकारी
कुछ तो करते सराररा
कुछ तो गावत है गारी
ये लालू की नीति ढिंढोरा
पीट के होली मिलते
कुछ नेता तो छुप जाते है
कुछ तो बिस्तर पर है मिलते
लालू जी के अंग पे
रंग गुलाल की शोभा
लाल गुलाबी रंग
बदन को देख के लोभा
औरों को देत मिठाई
खुद खाते है रबड़ी।
सब पिटत है ढोल
लालू जी पिटत डफली
यादव जी की सफल तपस्या
जीते जीत की जंग
लालू जी कर दिन्हा
राबड़ी जी को बदरंग
प्यारा ये त्योहार
रंग भंग हँसी ठिठोली
लालू जी खेलत है
सब लोगन संग होली


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