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ISSN 2292-9754

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12.02.2014


बुलंदी की चढ़ाई यार मेरे..

बुलंदी की चढ़ाई यार मेरे तुम भी चढ़ लोगे।
बना के राह ख़ुद अपनी उसी पे आगे बढ़ लोगे॥

नहीं हूँ चीज़ छोटी सी तुम्हें ये मानना होगा।
सुनोगे जब कहानी मेरी एक अहसास दृढ़ लोगे॥

मेरे नग़मों को सुनते थे अभी तक जिस बेग़ानी से।
उन्हीं को पढ़ के फिर से तुम नया इतिहास गढ़ लोगे॥

कि चाहूँ मैं, कि पूजूँ मैं, यही सोचोगे बस हर पल।
लगा कर दिल में तुम अपने मेरी तस्वीर मढ़ लोगे॥

ज़बानी है मेरे क़िस्से, कि मैं अब सुर्ख़ियों में हूँ।
यकीं आएगा जब तुम आज का अख़बार पढ़ लोगे॥ 


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