शालिनी श्रीवास्तव "शानू"

दीवान
कश्ती बिना पतवार के...
क्या लिखूँ .....
बुलंदी की चढ़ाई यार मेरे..
शोरिशे-हस्ती मिटाना चाहती हूँ
कविता
कविता
मेरी डायरी के कुछ पन्ने..