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12.31.2007
अनूदित साहित्य - पंजाबी कविता

वह पौधा
लेखक : डॉ. सुखपाल सिंह
हिन्दी रूपांतर : डॉ. शकुन्तला तलवाड़


वह पौधा
स्वतः ही
अपना खोल
भेद देगा
ऊपर पड़ी मिट्टी का
भार झेल लेगा
उसकी रगड़
सह लेगा
जड़ पकड़ लेगा
स्वयं ही,
मिट्टी में से मुख
बाहर निकाल लेगा
सीधा खड़ा हो जाएगा
शरीर में से उसके
कोंपलें भी
स्वतः ही प्रस्फुटित होंगी,
अपनी खुराक
बना लेगा खुद ही,
जुटा लेगा जीने के
समस्त साधन भी

बस एक बार
मैं उसे अपने भीतर
जगह तो दे दूँ ।


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