हिलोर लेखक : डॉ. सुखपाल सिंह हिन्दी रूपांतर : डॉ. शकुन्तला तलवाड़
किनारे पर खड़े बच्चे ने स्थिर पड़े पानी में पत्थर फेंका पानी के सीने में दर्द हुआ स्थिरता भंग हुई पानी हहर उठा बच्चे का प्रतिबिम्ब भी हहराया कतरा कतरा हो पानी की बूँद बूँद में रम गया पानी के सीने से लहरें उमड़ीं बच्चे के पैर छूने को उमंगित हो किनारे की ओर बढ़ीं ममता की हिलोर थी हर लहर में ।