शकुन्तला श्रीवास्तव


कविता

किस छाँह तले बिखरा गजरा
तिनका ही जब छूट गया तो
उदास गीत कहाँ वादियों ने ..
फूल तो खिलते हैं
चितवन किरन गोरिया चाँदनी नहायी