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09.22.2007

 
 
नाम : शकुन्तला श्रीवास्तव
  शकुन्तला श्रीवास्तव का जन्म अंबाला (पंजाब उस समय) के एक संभ्रान्त कायस्थ परिवार में हुआ। ये परिवार अपनी पढ़ाई लिखाई व लेखों के रूप में जाना माना जाता था।
अपनी उच्च शिक्षा एम.ए. के पश्चात्‌ आप अध्यापक के रूप में गवर्नमेंट कॉलेज फ़ॉर वूमन, लुधियाना(पंजाब) में सेवारत रहीं और अध्यक्ष के पद से सेवा निवृत्ति पायी।
प्रारम्भ से ही हिन्दी साहित्य-प्रेमी और कविता के क्षेत्र में प्रगति करती चली गयीं। कवयित्री के रूप में गहराई, जीवन दर्शन, मधुरता से पंजाब कोकिला के रूप में आकाशवाणी एवं दूरदर्शन ने उनकी पहचान को पंजाब तथा भारत भर में और भी ख्याति दी। उनकी कविता और मीठी आवाज़ ने देश से बाहर भी जाने का अवसर दिया।
इन्होंने १९९३-९४ में मारीशस में चतुर्थ विश्व हिन्दी सम्मेलन, १९९९ में छ्ठा विश्व हिन्दी सम्मेलन लंदन एवं न्यूयॉर्क में आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में पंजाब का कवयित्री एवं साहित्यिक लेखिका के रूप में प्रतिनिधित्व किया। मैन्चेस्टर, यॉर्क, बर्मिंघम, टोरोंटो (कैनेडा) में होने वाले कवि-सम्मेलनों में भाग लिया।
आपने पंजाब प्रान्त में पिछले तीन दशकों से हिन्दी के प्रचार प्रसार में अभूतपूर्व कार्य किए एवं हिन्दी साहित्य-परिषद्‌ (रजि.) पंजाब की अध्यक्षा के रूप में अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में और पंजाब में साहित्य की दीपशिखा बनकर लेखन कार्य भी किया। सम्मानित हिन्दी, उर्दू व पंजाबी के लेखकों को सम्मान दिया। आपने काव्य संग्रह की १० पुस्तकें लिखीं।
प्रकाशित काव्य-संग्रह
१. गूँज री पायलिया
२. धूप छाँही नक्श
३. दरिया-दरिया पानी
४. टुकड़ों में परछाई (केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, दिल्ली द्वार पुरस्कृत)
५. अंजुरी भर चाँदनी
६. पंख रेशमी
७. तैरती धुनें हवाओं की
८. जाने भोर कहाँ हो जाये (भाषा विभाग पंजाब द्वार पुरस्कृत)
९. महक गुलाबी, धूप केसरी
१०. पंख क्या अब आसमां क्या।

म्मान एवं पुरस्कार
१. आर्य प्रतिनिधि सभा, पंजाब
२. चित्रांश संस्था, लखनऊ
३. सदस्य ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया
४. कानपुर में कालेज द्वारा
५. पंजाब का प्रतिनिधित्व, मारीशस, लंदन व न्यू यॉर्क
६. सदस्य पंजाब सलाहकार समिति
७. अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में साहित्यकार विशेषज्ञ के रूप में हिन्दी वर्कशाप में आमंत्रित