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10.04.2008
 

विश्वास
शकुन्तला बहादुर


भविष्य तो अनागत है,
अतीत हो गया व्यतीत ।
फिर उदास क्यों रहें,
मन करें क्यों व्यथित ।।

वर्तमान साथ है,
इसमें तो कुछ करें ।
ध्येय की प्राप्ति में,
प्रतिपल हम मग्न रहें ।।

मार्ग के कंटक सब,
फूल बन जाएँगे,
कष्ट दूर होंगे और
सुख के दिन आएँगे ।।


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