विश्वास शकुन्तला बहादुर
भविष्य तो अनागत है, अतीत हो गया व्यतीत । फिर उदास क्यों रहें, मन करें क्यों व्यथित ।।
वर्तमान साथ है, इसमें तो कुछ करें । ध्येय की प्राप्ति में, प्रतिपल हम मग्न रहें ।।
मार्ग के कंटक सब, फूल बन जाएँगे, कष्ट दूर होंगे और सुख के दिन आएँगे ।।