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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


होली गीत
प्रस्तुति - शकुन्तला बहादुर

 रचना - डॉ. रमा सिंह
प्रसिद्ध कवयित्री एवं पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्षा,
जोधपुर विश्वविद्यालय

रंगीली ओढ़नी ओढ़े, धरा पर आ गई होली।
गगन में छा गई होली, हमें तो भा गई होली॥

कहीं पिचकारियाँ सुन्दर, कहीं किलकारियाँ मनहर।
फुहारें रंग की बौछार, करती आ गई होली॥

कहीं पर रंग की मस्ती, कहीं पर खो गई हस्ती।
हृदय की कालिमा को चीर, मन पर छा गई होली॥

ये बहुरंगी अबीर गुलाल के बादल,
उड़ाती आ गई होली, ये नभ में छा गई होली।
रंगीली मुस्कुराहट ले, धरा पर आ गई होली॥


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