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05.23.2017
 
मैं खुश हूँ
डॉ. शैलजा सक्सेना

मैं खुश हूँ
कि मुझे खुशी के विरलेपन का अहसास हो गया है
मैं दुखी हूँ
कि मुझे दुख के बहुतायत का अहसास हो गया है।

आदमी कैसे जिया
आदमी कैसे मरा
इस समीकरण पर विचार का
समय कहाँ है किसी के पास।
                    जीने का पैमाना बस इतना है
                    कि आदमी कितना हँसा
                    और आदमी कितना रोया


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