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ISSN 2292-9754

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06.22.2017


गाँठ में बाँध लाई थोड़ी सी कविता

डॉ. शैलजा सक्सेना
आँचल की गाँठ में
हल्दी-सुहाग में
साथ-साथ बाँध लायी अम्माँ की कविता!
चावल-अनाज में
खील की बरसात से
थोड़ी सी चुरा लायी जीवन की सविता!
मढ़िया की भीत पे
सगुन थाप प्रीत से
सीने से लगाय लाई थोड़ी सी कविता।
मैया ने अच्छर दिये
बापू ने भाषा दी
भैया के जोश से उठान लाई कविता।
सासू जो बोलेगी
ताने यदि गूँजेंगे,
तकिया बनाय आँसू पोंछेगी कविता!
रौब कोई झाड़ेगा
शेर सा दहाड़ेगा
खरगोश सी सीने में दुबकेगी कविता।
पेट भले भूखा हो
जीवन चाहे रूखा हो
जीवन को जीवन बनाय देगी कविता।
ए मैया, उपकार किया
मुझ को पढ़ाय दिया
मुश्किल की घड़ियों में साथ देगी कविता।
आँसू में गीत पलें,
लोरी में नींद जले,
जीवन को नदिया बनाय देगी कविता।


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