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05.23.2017
 
साँस भर जी लो
डॉ. शैलजा सक्सेना

तपो,
अपनी आँच में तपो कुछ देर,
होंठों की अँजुरी से
जीवन रस चखो-
बैठो...

कुछ देर अपने सँग
अपनी आँच से घिरे,
अपनी प्यास से पिरे,
अपनी आस से घिरे,
बैठो...

ताकि तुम्हे कल यह न लगे
साँस भर तुम यहाँ जी न सके।।


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