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01.26.2008
 

हे भगवान! मुझे कुत्ता मत बनाना
शैलेश भारतवासी


भागा जा रहा था वो
पग-पग पर खून के धब्बे छोड़ते हुए
पीछे ये खून के प्यासे
देखता जा रहा था इधर-उधर
आँखों में दया की भीख थी
शायद कोई दिख जाए राम या रहीम
शायद कहीं उतर आये ख़ुदा
बचा ले उसको दरिन्दों से
पर नहीं था वो मनुष्य
बेचारा कुता!

क्या जाने वो
परमात्मा ने हमेशा लिया है अवतार
मनुष्यों के लिये
काश कि पढ़ा होता वो भी
गीता और कुरान
मालूम होती उसे बाइबिल की सीमाएँ
हमेशा अस्तित्व का खतरा हुआ है
इन्सान को
कुत्तों के भविष्य में इससे बढ़कर कुछ नहीं
दिखाओ हमेशा वफ़ादारी एक बेईमान को
करते रहो रखवाली आश्रयदाता की
नहीं करोगे तो जाओगे कहाँ
है सीमित
तुम्हारे लिये इस धरा की जमीन

“हे भगवान!
बना दे इस बार मुझे भी मनुष्य
ताकि मिटा सकूँ ये विडम्बनायें
खत्म कर दूँ असमानतायें”
सहसा लड़खड़ा गया वो
क्या कोई अपशब्द कहा था उसने
शायद.....
देखना बन्द कर दिया था इधर-उधर
दौड़ते-दौड़ते पहुँच गया था
दूसरी दुनिया में
हो सकता मिला हो सकूँ उसे वहाँ!!!


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