गाँव में हुआ जब पहला खून, पहली डकैती, पहला बलात्कार यद्यपि कुछ भी पहली बार नहीं हुआ था उनकी याददाश्त की समय सीमा ही थी वह सन्न थे सब अवाक ! लगा था उन्हें आघात भय से पीले पड़ने की हद तक धीरे-धीरे वे सहज हुए फिर बाद को उनकी संतानें अभ्यस्त हो गईं ऐसी वारदातों की