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01.15.2012
 
गीत बहुत बन जाएँगे
शैलेन्द्र चौहान

 

यूँ गीत बहुत

बन जाएँगे

लेकिन कुछ ही

गाए जाएँगे

 

कहीं सुगंध

और सुमन होंगे

कहीं भक्त

और भजन होंगे

 

रीती आँखों में

टूटे हुए सपन होंगे

बिगड़ेगी बात कभी तो

उसे बनाने के

लाख जतन होंगे

 

न जाने इस जीवन में

क्या कुछ देखेंगे

कितना कुछ पाएँगे

सपना बन

अपने ही छल जाएँगे

 

यूँ गीत बहुत

बन जाएँगे

लेकिन कुछ ही

गाए जाएँगे


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