शैलेन्द्र चौहान


कविता

अतीत
अदेह
उदासीनता

उपसंहार
कामना
क्षत-विक्षत

गीत बहुत बन जाएँगे
छवि खो गई जो
तड़ित रश्मियाँ

धूप रात माटी
परिवर्तन
बड़ी बात
मारे गए हैं वे
यह है कितने प्रकाश वर्षों की
दूरी
लोकतंत्र
वह प्रगतिशील कवि
विकास अभी रुका तो नहीं है
विरासत
विवश पशु
विवशता
समय
समय-सांप्रदायिक

स्वप्निल द्वीप
सूत न कपास
 
 

कहानियाँ

जनाब, हम भीख नहीं माँगते
मेरे सामने वाला
संप्रति अपौरुषेय

समीक्षा

अक्षयवट : इलाहाबाद के भीतर एक और इलाहाबाद की तलाश

प्रेमचंद साहित्य में मध्यवर्गीयता की पहचान

 

संस्मरण

एक यात्रा हरिपाल त्यागी के साथ