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ISSN 2292-9754

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02.06.2017


वो चूल्हा

घर में दूध की ज़रूरत
रात का समय
सोचा घूम भी आऊँ
व जुम्मन काका के
घर से ले आऊँ लोटा भर दूध,

पहुँची वहाँ, खटखटाया बाहर
का दरवाज़ा,
छोटी बालिका ने खोला,
लिवा गई मुझे अन्दर
बड़े से आँगन में,
देख मुझे जुम्मन काका खड़े हुए
कारण पूछ आने का, कर
इशारा बेगम को मेरे पास
बैठ गये

हैरान थी मैं देख,
सब बैठे थे चूल्हे के इर्द-गिर्द,
बच्चे चबा रहे थे दाने,
भून रहे थे आलू,
बुजुर्ग सेंक रहे थे आग,
पर सब ख़ुश,
बतिया रहे थे,
कि इक ख़्याल ने मुझे
झकझोर दिया,

कितनी ताक़त है इस
चूल्हे में,
इसने जोड़ा है मुन्नी
से दादा तक इक ही
डोर में सबको।


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