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07.19.2014


तस्वीर

धुंधली हो गई
सारी यादें,
सारी तस्वीरें,
चूर हो गये सारे
इरादे सारे वादे
समय का पहिया
किसे नहीं रौंदता,
पर क्यूँ नहीं
धूमिल पड़ी
वो तस्वीर, जो
तुम्हारे आने पर
छपी थी मेरे
मानस पटल पर,
सब कुछ स्वार्थहीन
सुन्दर, सलोना,
दिखाता मुझे
सदैव मेरा अक्ष
वही तस्वीर
याद करो, ज़रा याद करो।


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