परन्तु शायद रोटी से
ज्यादा खूबसूरत होती है
सेठ की प्लेट, चाँदी या सोने की,
परहेज से भरी उसकी रोटी।
परन्तु क्यूँ कहती है सभी
को कि गेहूँ से ही तो
बनी होती है सभी की रोटी
फिर क्यूँ भागता है आदमी
फिर क्यूँ दिशाहीन होता है आदमी
व खुद को चक्रव्यूह में
धकेलता है आदमी।