दो लकड़ियाँ सुलगा माँ ने पतीला धो माँज कर ढक कर, पाव भर पानी डाल रख दिया चूल्हे पर, आस बंधी बच्चों की, पर रोटी जा iटकी चाँद पर और बुझ गई लकड़ियाँ सो गये बच्चे टाट पर ओढ़कर टाट की मखमली रजाई।