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05.03.2012
 
रोटी
शबनम शर्मा

दो लकड़ियाँ सुलगा
माँ ने पतीला
धो माँज कर
ढक कर, पाव भर पानी
डाल रख दिया चूल्हे पर,
आस बंधी बच्चों की,
पर रोटी जा iटकी
चाँद पर और
बुझ गई लकड़ियाँ
सो गये बच्चे
टाट पर ओढ़कर
टाट की मखमली
रजाई।


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