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05.03.2012
 
प्रश्न
शबनम शर्मा

मत करो मुझसे कोई
भी प्रश्न
मैं प्रश्नों से घिरी
ज़िन्दगी जीना नहीं चाहती।
छटपटाती है ज़िन्दगी
तो कोई भी पूछता नहीं
फिर क्यों टकटकी सी
लगाते हो, जब कभी
चेहरे पर मुस्कुराहट
आती है पल भर के लिए
छिपाये हैं मैंने आँसुओं के
सैलाब, कई काली भीषण रातों,
तरसते दिल में।


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