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ISSN 2292-9754

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10.11.2016


मेरे नन्हे

बहुत सूना है मेरा मन,
तुम बिन।
इक पल भी तुम्हारी
याद मन से नहीं जाती,
तुम भी ढूँढते होगे मुझे,
मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ,
तुम मेरी ज़िन्दगी की आस हो,
तुम ही मेरी साँसों का विश्वास हो,
क्यों तुमसे अलग रहना पड़ रहा,
कहाँ भारी पड़ गये थे
तुम्हारे घर में हम
सिहर उठती हूँ तुम्हारी याद में
मन अशान्त हो जाता है
फड़फड़ाती हूँ मैं, पर कुछ
कर नहीं सकती।
मेरी भावनाओं से खिलवाड़
हुआ है, मैं ठगी सी
रह गई हूँ, तुम बिन
मेरे नन्हे फ़रिश्ते।


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