लम्बी इन्तज़ार के बाद पागल था घर आँगन, मनाए जा रहे थे जश्न, कि बबुआ आया है, परन्तु न जाने क्यों भूले बैठे थे सब कि ममता में लिपटी जन्मी है इक माँ भी आज।