|
सेठ के घर
में विवाह का माहौल,
जमकर रौनक और नई बहू के आने की खुशियाँ मनाई जा रही थीं। पोपले से मुँह
वाली दादी माँ कब से नई बहू के पास ही बैठी उसे निहार रही थी। पोता सुमित
उन्हें अति प्रिय था। उसकी बहू को लेकर दादी ने कई सपने संजो लिये थे। आखिर
वो दिन आ ही गया जब बहू सजी-सिमटी सी उनके पास बैठी थी। मेहमान चले गये अब
सिर्फ घर वाले ही घर में थे। दादी ने सुबह उठकर पूजा की फिर अपने बहू-बेटे
को बुलाया। सबने नाश्ता पानी किया उसी मेज पर बहू को दादी ने सबके सामने
अपने कीमती जड़ाऊ,
खूबसूरत कंगन पहनाए। कंगन पाकर बहू की खुशी का ठिकाना न रहा। बहू अपनी गोरी
बाँहों में कंगन निहारने लगी। सभी ने उन कंगनों की जी भर कर प्रशंसा की व
बताया कि दादी को ये कंगन उनकी सास ने दिये थे व उन्होंने कब से अपने पोते
की बहू के लिए संभाल कर रखे हैं। कुछ देर बाद बहू अपने कमरे में चली गई।
सपने संजोती,
कि
वह यह कंगन भाई की शादी में,
देवर की शादी में पहनेगी। सब उसकी तारीफ करेंगे। किसी के पास उसके जैसे
खूबसूरत कंगन नहीं हैं। वह कमरे में रखे बड़े शीशे के सामने बैठ गई व हर रंग
की चूड़ियों के साथ मिला-मिलाकर देखने लगी। इतने में उसकी सास कमरे में आईं
और मुस्कराते हुए बहू की तारीफ करते-करते उन्होंने वो कंगन बहू से लेकर
अपनी कलाई में सजा लिए। ये कहते हुए
“अभी
तुम बच्ची हो,
इतनी कीमती चीज कैसे संभालोगी,
घूम-फिर आओ,
फिर पहन लेना,
तुम्हारी ही चीज है।”
बहू का चेहरा उतर गया परन्तु कुछ भी कहते न बना। देवर की शादी,
भाई की शादी सब हो गई। बड़ा मन हुआ कि वो वही कंगन पहने। परन्तु कोई न कोई
बहाना गढ़कर सास ने मौके टाल दिये। कभी,
हाय नज़र लग जायेगी। तो कभी इसके साथ की,
दूसरी जोड़ी तो है नहीं,
तुम्हारी देवरानी नाराज़ हो जायेगी। उसे बुरा लगेगा। आखिर बहू ने कहना ही
छोड़ दिया। जम्मेदारियाँ बढ़ती चली गईं। समय की तीव्र गति ने बालों का रंग
बदल दिया। माँसल गोरी कलाइयाँ झुर्रियों में बदल गईं। अब वो दो बच्चों की
माँ थी। उन्हें पढ़ाते-पढ़ाते वो कब बूढ़ी हो गई पता ही न चला। बेटे का रिश्ता
आया। शादी हुई। ठीक उसी तरह से आज माँ जी ने वो कंगन अपने पोते की बहू को
पहनाए। आज खड़ी-खड़ी वो सोचती रही कभी ये कंगन उसे मिले थे आज उसकी बहू को।
वो ये कंगन उसे पहनने देगी। कितनी सजेगी जब वो चूड़ियों के साथ अपनी ननद की
शादी में पहनेगी। उसने बहू से कुछ भी नहीं कहा।
करवाचौथ
आया,
पूछ बैठी,
“बहू
माँ जी वाले कंगन शाम को जरूर पहनना।”
जवाब मिला,
“मम्मी,
वो
पुराना डिज़ायन,
मैंने तो तुड़वाकर उसका सैट बनवा लिया है।”
कहकर नई बहू अलमारी से सैट लेने गई व पुरानी बहू शून्य में ताकती रह गई।
|