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ISSN 2292-9754

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05.25.2016


दादा-दादी

कृष्ण की शादी हुए 6 बरस हो गये हैं। वह परिवार दिल्ली से हमारे पड़ोस में रहने आया है। छोटा सा 4-4½ साल का बच्चा, उसकी बीवी और वो। बच्चा दौड़ता-भागता, कई बार हमारे घर आ जाता, खेलकर वापिस चला जाता। मेरे घर में मेरे पोता-पोती हैं। बात-बात में दादा-दादी बोलते-बोलते कई फ़रमाइशें पूरी कराते रहते हैं। वह भी बीच-बीच में दादी बोल देता। मुझे अच्छा लगता।

मैं एक दिन शाम को बच्चों को घूमाने ले गई तो वह भी मेरे पीछे-पीछे आ गया। उसकी मम्मी भी उसके पीछे दौड़ती चली आई। बात-बात में बच्चे ने मुझे 3-4 बार दादी कहा और इशारा कर-करके माँ को बताया कि मैं आनन्द की दादी हूँ। फिर पूछने लगा, "माँ, मेरी दादी क्यूँ नहीं आती?"

माँ का जवाब था, "आयेगी।"

फिर मैं पूछ ही बैठी, "इसकी दादी है?"

"हाँ मैम, है पर हमारी एक भूल की वज़ह से हमसे नाराज है। उन्होंने हमें घर से निकाल दिया। हमने अपनी मर्जी से शादी की थी। उन्हें ये मंजूर न हुआ। हमने इसके लिये कई बार माफ़ी माँगी, उन्हें मनाने की कोशिश की परन्तु नाकाम। इस बच्चे के होने पर हम घर भी गये परन्तु उन्होंने मिलने व बात करने से इन्कार कर दिया। हम लौट आए। कभी फ़ोन करें तो उठाते भी नहीं।"

मैं सोचने लगी इन बड़ों के काम या गलतियों में इस नन्हें का क्या क़ुसूर।


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