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नन्ही कली अलविदा
लेने से पहले
दे गई चेतावनी,
क्या सोचते हो,
चला पाओगे वंश
मुझ बिन,
किताबों में पढ़ोगे
चूड़ी की खनखन
पायल की झन्कार
माथे की बिंदिया
बहन का प्यार
बेटी का दुलार।
चहुँ ओर पाओगे
घोर अन्धकार
क्योंकि लड़की
प्रकृति है
ज्योति है
समाज का अस्तित्व
टिका है सिर्फ
इसकी कोख में
विनाश के बढ़ते कदम
रोकने होंगे,
वरन् वो दिन दूर नहीं
जब सोचोगे
हमने खुद ही कुल्हाड़ी
मारी है अपने पाँव पर।
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